PROFILE : यादों का सफर
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Deepak Pawar
Mrs. Hansa D Pawar
- Birthday: 09 December
- Anniversary: 20 December
- Navagam (GUJ)

यादों का सफर - प्रकरण ११
मैं दीपक पवार…“सूरत – सोना नी मूरत” शहर से डिजिटल डायरी के लिए अपनी यादे साझा करता हु।
न कोई हीरो, न कोई लीड रोल, बस एक मनमौजी सा आदमी जिसकी पूँजी उसके दोस्त और उसकी यादें हैं।
लगभग रोज़ का किस्सा था। कॉलेज जाने के लिए तैयार होकर मैं सिद्दीक के आने की राह ताकता। सिद्दीक आता, तो हम राजकुमार के घर तक पहुँचते। कभी-कभी कुतुबुद्दीन भी जुड़ जाता। फिर वो पूरा काफ़िला जगदीश बांदिल के घर की तरफ़ बढ़ता और वहीं से हम दीवानों की टोली धामाल, मस्ती, शोर-शराबे के साथ कॉलेज कूच करती। ये कोई प्लान नहीं था, ये हमारी रूटीन थी… दिल से बनी हुई।
कॉलेज पहुँचे तो परेश, भारतभूषण मिलते। और जब-जब प्रदीप कॉलेज आता, वो भी अपने आप टोली का हिस्सा बन जाता। न कोई औपचारिकता, न कोई इन्विटेशन बस एक अपनापन था।
कॉलेज के बाद कहानी का दूसरा अध्याय शुरू होता। महाराज की या जनता होटल की चाय से। एक-एक कट में पूरी दुनिया की चर्चा निपट जाती।
फिर परेश की गद्दी–तकिए वाली दुकान। हम ऐसे पैर फैलाकर बैठते मानो बहुत बड़ा बोझ ढोकर आए हों जबकि सच ये था कि बोझ नाम की चीज़ तब ज़िंदगी में थी ही नहीं।
हँसी-मज़ाक, हल्की-फुल्की खिंचाई, और फिर धीरे-धीरे सब अपने-अपने घर की राह नापते।
ऐसा नहीं कि कॉलेज में यही मेरे दोस्त थे। मैं दोस्ती में वर्सेटाइल था हर कोने में मेरे यार थे। पर ये लोग… ये मेरे बडीज़ थे। जिनके साथ बिना कहे भी सब समझ में आ जाता था।
जब डॉ. राजेश बजाज ने गोल्डन मिट की बात की, तब से मन रोज़ किसी न किसी मोड़ पर अटक जाता है।
ख़यालों में वही चेहरे, वही आवाज़ें, वही ठहाके। मैं बेसब्री से जानता हूँ
वो घड़ी आएगी… आएगी ज़रूर।
बस और क्या, मिलते हैं दोस्तों…—–21 फ़रवरी को
