PROFILE : यादों का सफर

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Praful Kapadia

Mrs. Ranjana P Kapadia
  • Birthday: 21 October
  • Anniversary: 30 November
  • Burhanpur (MH)
21 prafulkapdiya

यादों का सफर - प्रकरण ०७

आज फिर बीते दिन मन के 

दरवाज़े पर आ खड़े हुए हैं…

पंकज, गुरदीप, राजीव, प्रफुल और सुदेश।

नाम लेते ही चेहरे उभर आते हैं,

और होंठों पर 

अपने आप एक मुस्कान आ जाती है।

क्या खूब थी

 *यारों की यारी  –  दोस्ती हमारी।* ** 

आज सब 

अलग-अलग शहरों में बस गए हैं

कोई नौकरी की भागदौड़ में,

तो कोई अपने

 कारोबार के हिसाब-किताब में 

उलझे हुए है।

ज़िंदगी ने सबको 

अपनी-अपनी राह पकड़वा दी है।

लेकिन जब कभी हम मिल बैठते हैं,

तो सालों का फासला

एक पल में सिमट जाता है।

वही पुरानी बातें लौट आती हैं,

वही बेवजह की हँसी,

और फिर कोई न कोई कह ही देता है,

“यार, एक बार फिर पंजा लड़ाएँ?”

और उसी पल दिल 

चुपके से कह उठता है

काश…

वो कॉलेज के दिन

एक बार फिर लौट आते।

कॉलेज के वो पुराने यार,

कंधे से कंधा मिलाकर

खुद को दुनिया का मालिक समझने वाले दीवाने।

क्लास से ज़्यादा बैठक हमारी

महाराज की होटल में लगती थी,

जहाँ गोल्डन चाय के हर घूँट में

हमारी दोस्ती घुली रहती थी।

हर शाम वही बहस,

कौन ज़्यादा तगड़ा है,

कौन सबसे खास।

कोई पूरे भरोसे से कहता

“व्यायामशाला तो मेरा दूसरा घर है,”

तो कोई हँसकर जवाब देता

“ताक़त कम न आको हमारी,

पटखनी कर सकते है तुम्हारी।”

हँसी-मज़ाक में बातें आगे बढ़ जातीं,

और अहंकार की

बस हल्की-सी चिंगारी सुलग जाती।

एक कहता

“आज मान जाओ,”

तो दूसरा आँखों में शरारत लिए बोलता

“पहले पकड़ तो पाओ।”

और तभी,

वो चुपचाप खड़ा रहने वाला दोस्त,

जिसकी ताक़त शोर नहीं करती थी,

और सोच हमेशा गहरी रहती थी।

एके दोस्त को उसने थामा,

और पल भर में

हवा में घुमा डाला।

दोस्त ज़मीन पर गिरा,

और हम सब ठहाके मारकर हँस पड़े।

अहंकार कहीं कोने में दुबक गया।

ना जीतने वाले में घमंड की खुशी,

ना हारने वाले पर कोई ग़म का विषाद।  

बस एक और याद

हमारी अन्य यादों में जुड़ गई।

आज शहर बिखर गए हैं,

रास्ते बदल गए हैं,

लेकिन दिल के किसी कोने में

कॉलेज आज भी ज़िंदा है।

चार दोस्त,

थोड़ी-सी नोकझोंक,

थोड़ी-सी लड़ाई, और बेहिसाब प्यार

यही तो थे –  हैं और हमेशा रहेंगे…

हमारे सुनहरे पल को

 तरोताजा रखने वाले यार।

🙏~ प्रफुल कापड़िया—१८.१२.२०२५

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