PROFILE : यादों का सफर

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Rajkumar Mehta

Mrs. Suchitra R Mehta
  • Birthday: 21 July
  • Anniversary: 22 April
  • Burhanpur (MP)
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यादों का सफर - प्रकरण १२

दोस्तों कॉलेज जाने की उत्सुकता ने साइंस कॉलेज में एडमिशन लेने के पूर्व अन्य दोस्तों से कॉलेज की गतिविधियों की जानकारी निकलवाई,  तो पता चला की को एजुकेशन ( लड़के लड़कियां साथ-साथ) पढ़ाई होती है। तथा सीनियर लड़कों के साथ-साथ सीनियर लड़कियां भी जूनियर लड़कों की बहुत रेगिंग लेती है। सीनियर लड़के व लड़कियों से थोड़े बच के निकलना और गर्दन नीचे झुककर सीधे क्लास रूम में घुस जाना, और हो सके तो रीसेस होने पर किसी भी सर  के पीछे-पीछे चलकर लाइब्रेरी में  जाना। क्योंकि लाइब्रेरी में रैगिंग नहीं हो सकती। चार-पांच दोस्त सभी साथ-साथ रहना तो रैगिंग  से बच जाओगे ।

 

पहले दिन तो मैं ,दीपक, जगदीश साथ-साथ कॉलेज पहुंचे जैसा समझाया था वैसा ही किया चुपचाप🚲🚲🚲 साइकिल रखकर तेजी से नीचे गर्दन कर फटाफट क्लासरूम (बालकनी) पहुंचे को एजुकेशन👫👫👫👫 की उत्सुकतावश पहले ही दिन हम तीनों ने एक ही बेंच संभाली। ईश्वर की कृपा से पहले दिन बिना रेगिंग के संपन्न हुआ .पहले दिन सिद्धीक, कुतुब से मित्रता होने के कारण दूसरे दिन हम पांच हो गए ।फिर तीसरे दिन परेश ,भारत भूषण ,प्रदीप अब हम आठ हो गए हौसला बढ़ गया। धीरे-धीरे रैंगिग का डर कम होने लगा ।धीरे-धीरे हम सभी साथ-साथ में ग्राउंड पर घूमने लगे 🚶🏽‍♂️🚶🏽‍♂️🚶🏽‍♂️।

 

कुछ दूसरी फैकल्टी के प्रथम वर्ष के अन्य दोस्तों से बातचीत करने लगे तब अचानक उन्होंने हमें चार सीनियर 👫👫लड़के लड़कियों के नाम बताएं और दूर से उनके दर्शन करवाए और कहा कि इनसे जरा संभल के रहना बहुत रैगिंग लेते हैं ।यह चार नाम  कल्पना हाथीवाला, संध्या भमोरे👭 विनय व्यास, हफीजुद्दीन झूलेवाला👬। इन चारों की नजरों से बचकर हम बड़े ही बुलंदी से कॉलेज कैंपस में घूमने लगे अचानक 15 -20 दिनों के बाद रीसेस के वक्त बेखौफ होकर हाॅल की पीछे की तरफ से तार फेंसिंग लगे ग्राउंड पर ताप्ती नदी का नजारा 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀देखने जा रहे थे कि अचानक कहीं से दोनों सीनियर लड़कियां कल्पना हाथीवाला ,संध्या भंमोरे उनके ग्रुप के साथ आई और हम सभी को इशारा करके हाॅल के पास बुलाया मेरे ख्याल से मैं , दीपक, जगदीश ,परेश ,भारत भूषण, प्रदीप तो थे ही साथ और भी चार-पांच दोस्त थे पहले इंट्रोडक्शन में नाम, पिता का नाम ,निवास पूछा फिर हाॅबी  एवम पढ़ाई का टारगेट पूछा और कहा कि अच्छी पढ़ाई करना, और सभी हंसने लगे हम समझे कि चलो हो गई रैंगिग, परंतु अगले ही पल कल्पना हाथीवाला और संध्या भमोरे ने जोर से चिल्लाकर कहा कि चलो सब मिलकर अपनी अपनी पैंट घुटनों तक चढ़ाओ और शर्ट कोहनी तक और शर्ट के ऊपर के दोनो  बटन खोलो ऐसा  ऑर्डर सुनकर हम सभी एक दुसरे को देखने लगे   चुपचाप सावधान की मुद्रा में खड़े रहे ,कुछ क्षण के बाद फिर उन्होंने कहा कि जल्दी करो नही तो तुम्हारी क्लासमेट्स लड़कियों के सामने मुर्गा बनवाएंगे, मुर्गा बनने से बचने के लिए सभी ने पेंट घुटने तक, शर्ट कोहनी तक और सामने के दोनों बटन खोलकर सरेंडर की मुद्रा में खड़े हो गए, फिर सीनियर हाथी वाला ने दहाड़ लगाई की अपने शर्ट को शर्ट   इन.से बाहर निकाल कर एक दूसरे का शर्ट पकडकर रेल की तरह घूम कर रेलगाड़ी चलाओ। हमने रेलगाड़ी बनकर दो राउंड लगाएं कि इतने में रीसेस खत्म होने की घंटी बजी ।सीनियर लड़कियां उनकी क्लास की तरफ मुड़ी हमारी रेल छुटी जान बची बाद में हम सभी अपनी क्लास (बालकनी) में आकर बैठ गए फिर क्लास छूटने पर हम सबने तय  किया कि अब दोनों सीनियर लड़कियों के ग्रुप से बच के रहना होगा ।जब जहां यह दिखे वहीं से  रास्ता बदलकर दूसरी तरफ चल दो ।परंतु किस्मत हमारे साथ नहीं थी दूसरी बार कल्पना हाथीवाला संध्या भमोरे बोटैनिकल गार्डन की तरफ से ऑफिस की तरफ आते दिखाई  दी और हम ऑफिस के पास से बोटैनिकल गार्डन की तरफ जाने का सोच रहे थे इनके दिखती ही हमने रास्ता बदलकर  ऑफिस के बाजू वाली गली से जूलॉजी लैब की तरफ भागे कि अचानक सामने से मैडम आ गई मैडम ने हमें भागते 🏃🏼🏃🏼🏃🏼🏃🏼🏃🏼🏃🏼🏃🏼🏃🏼हुए देखकर रोका और डाटा कि अभी तो आए हो और इतने पर निकल गए, हम चुपचाप मैडम की डांट सुनते रहे डांटकर मैडम अपने टीचर्स रूम में चली गई तब हम सभी की जान में जान आई ।मैडम की डांट सहकर भी हम खुश थे कि चलो दोबारा रेल की गाड़ी बनने से बच गए फिर कॉलेज छूटने के बाद सभी ने परेश  की दुकान पर डेरा डाला घंटोतक हंसी मजाक करते हुए कंट्रीब्यूशन की चाय नाश्ते का आनंद लेकर घर की तरफ प्रस्थान कर गए .🚶🏽‍♂️🚶🏽‍♂️🚶🏽‍♂️🚶🏽‍♂️🚶🏽‍♂️🚶🏽‍♂️🚶🏽‍♂️🚶🏽‍♂️….. इती रैगिंग कांड एपिसोड संपनम…… अगली बार अन्य यादो के एपिसोड के साथ आयेगा……………..

 

आपका अपना दोस्त ,,……राजकुमार मेहता.

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