Profile : यादों का सफर
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Bharatbhushan Pandey
Mrs. Kalpana Pandey
- Birthday: 12th April
- Anniversary: 02 June
- Burhanpur (MP)

यादों का सफर - प्रकरण १४
1979 Bsc 1st year बाहर से आकर नए शहर नए कॉलेज मै प्रवेश उसके लिए सभी नया तो फिर वो बिंदास। क्रिकेट का जूनून बचपन से, जकी सर प्रिसिपल से मुलाकात पहले ही हो गई कभी कोई दिक्कत हो तो आना मेरे पास उनका कहना क्योंकि सब लोकल वो नया पर जूनून क्रिकेट का ऐसा की कल एग्जाम हो ओर आज मैच तो मैच तो खेलना ही है बाकी देखा जाएगा। बिंदास
। पता किया तो हफीज भाई क्रिकेट टीम के कफ्तान पहुंचा ग्राउंड तो थर्डमैन पर दो दिन न बैटिंग न बोलिंग ऊपर से सीनियर का टैग उनके ऊपर बीएससी फाइनल के थे पर तीसरे दिन ग्राउंड पर बहस पूरी टीम के सामने सब लोकल पर लड़का नया जुनून क्रिकेट का बिंदास
। क्योंकि २दिन से वो सभी को देख रहा कौन बैटिंग कौन बोलिंग ओर क्या कैपेसिटी, फिर क्यों न बोले, तीसरे दिन हफीज भाई ने सबसे पहले पैड करवाए मतलब बैटिंग उसके बाद हफीज भाई भी इंप्रेस ३/४ दिन बाद मै टीम का अहम मेंबर फिर तो मैच ओर मुसीबत मै मुझसे सलाह भी लेते ओर प्रैक्टिस मै अब उन्होंने पूरा चार्ज मुझे दिया मतलब हफीज भाई को भी जब मै कहूंगा तब वह पैड पहनेंगे बैटिंग के लिए हालांकि वह भी अच्छे खिलाड़ी थे और इंसान भी अच्छे अगले साल टीम खंडवा गई चौधरी सर मैनेजर बनकर खंडवा की टीम से मैच लेफ्ट आर्म मीडियम पेसर ने पूरी कादरिया कॉलेज की टीम समेट दी गजब का इनस्विंगर्स बोलर नाम था gadrey, मै ओपन गया ६८या७८ रन मेरे ओर अंत तक आउट नहीं पर टीम हार गई यूनिवर्सिटी के लिए मेरा चयन और दर्शन का भी वो कफ्तान था ओर नागर सर की कृपा थी उस पर २लोग कॉलेज के खर्चे पर यूनिवर्सिटी की टीम के लिए सागर प्रोसीड, पर जब लौट कर आए तो नागर सर सलीम सर चौधरी सर कुछ बॉयज भी खड़े थे और सुदेश भी ,मुझे आता देख सुदेश ने बोला सर कॉलेज का सुनील गावस्कर आ रहा सबने सुना मैने भी सुना तुलना तो नहीं थी पर सम्मान जरूर था नागर सर ने गले लगाया और कहा पांडेय प्रैक्टिस करो और प्रैक्टिकल की चिंता न करना लैब अटेंड करो या न करो उस समय वह स्पोर्ट आफिसर भी थे , कॉलेज अच्छा, स्टाफ अच्छा साथी अच्छे अनुशासन अच्छा, पर जूनून क्रिकेट का लड़का बाहर से आया उसके लिए सब नया तो बिंदास
।।
अधूरा लगा न तो छोड़ हीअधूरा रहा हूं क्योंकि पोस्ट लंबीहो गई मैने पंकज को बोला भी था कि भाई किस्से तो है बोलने मै आसान लिखने मै लंबे लगते है। आर्टिफिशियली करो तो कम मै हो जाता है शब्द भी साहित्यिक पर किस्सों को सही बयान करो तो भाषा देसी हो जाती है और जगह भी ज्यादा घेरते हैसभी grp member से अनुरोध है कि कुछ लोग काफी मेहनत कर रहे इस मीट के लिए तो एक बार मै ही डॉ साहब ओर पंकज की सुन ले नहीं तो मिलने पर एक लड़का नया, शहर नया ये मीट भी नई ओर जूनून इस बार क्रिकेट का नहीं मीट का बॉयज के साथ उनकी पत्नियां, गर्ल्स के साथ उनके पति वो सभी के लिए नए भले उनके खुद के लिए वो पुराने हो गए, बिंदास
arey koi धमकी nahi de raha kai logo ki mehnat ko मिलकर sab सफल बनाए बस
कई बाते इस एक किस्से मै भी छूट गई कई लिमिटेड लोग क्लास के साथ थे मेरे वे लोकल थे आज भी है उनका शुक्रिया की उन्होंने मुझे अपनाया क्योंकि ये भी सच ही है लोकल होने के बाद भी सभी के grp बने थे मिलते सभी सभी से थे पर वो उम्र ही कुछ ऐसी थी अब ४५ साल बाद उम्मीद करता हूं क्या गर्ल्स क्या बॉयज सभी अब पारिवारिक रूप से सभी से एक गठबंधन मै दृढ़ता से बंध जायेगे और अपने दुख सुख मै सभी को शामिल करेंगे ।
एक नई उम्मीद,एक बहुत बड़ा नया परिवार,एक नया हौसला , एक नया सुनहरा भविष्य १९७९ मै प्रिंसिपल (मूलधन) बहुत कम था पर इंट्रेस्ट (सूद) सहित अब वापस मिल रहा इसको सभी दिल से महसूस करेंगे सम्मान रखेंगे
बस इतना ही ।
आपका सभी का पांडेय
