PROFILE : यादों का सफर

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Giribala Dalal

Mr. Hemant Gujarati
  • Birthday: 05 December
  • Anniversary: 02 June
  • Parola (MH)
08 giribala dalal

यादों का सफर - प्रकरण १९

कादरिया कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले ही  एक सहेली के  साथ कॉलेज को बाहर से देख आई।

एक और ऐतिहासिक किला था जो ताप्ती तट पर है और दूसरी और कॉलेज का केम्पस देखा। तभी मन बनाया था कि इसी कोलेज में दाखिला लेना है। बी एस सी बायोलोजी में ऐडमिशन भी  मिल गया।

 

आखिरकार कॉलेज जानेका पहला दिन भी आ गया। कॉलेज जानेके लिए मन बहुत उत्साहित था । सोचा था कॉलेजमें नए दोस्तोंके साथ मुलाकात होगी और कोएज्युकेशन  के लड़के और लड़कियां दोनों साथमे पढ़ेंगे। चूंकि कोएज्युकेशन का अनुभव नया था अतः थोड़ी असहज भी थी।  नइ सहेलियों के लिए तो मैं बहूत उत्सुक थी पर साथमे थोड़ी आशंकित थी कि “न जाने कैसे सहपाठी होंगे?” पर जैसे ही कॉलेज के पीछे के भाग में रेलिंग देखी जहा से प्रकृति का अनुपम सौंदर्य दिख रहा था, ये सब विचार उड़नछू हो गए। 

 

सुबह सुबह प्रकृति को महसूस कर ही रही थी कि अचानक एक सहेली ने रैगिंग की बात छेड दी। इसी कारण पहले आठ दस दिन कॉलेज जानेके लिए मन बहुत डरता था।  सिनियर छात्र- छात्राए कब किसकी कैसी रैगिंग लेंगे ? सबके सामने मजाक तो नही बन जाएंगे?  

कॉलेज खुलने के लगभग एक माह के अंदर रैगिंग का डर खत्म हो गया।और हम सभी क्लासमें और प्रागंण में आजादीसे घूमने लगे। रिसेसमें,  हम चारों साधना, रक्षा, दर्शना और में,  – कॉलेजके बाहर कार्नर पर तूरखट्टी शेव और इमली लेने जाते थे। हम चारोंको शेव और इमली बहुत पसंद थी।

कॉलेजमें नियमित पीरियड और प्रैक्टिकल भी शुरु हो गए। जेलिस मैडम जूलॉजी पढ़ाती थी। उन्हें किसी भी लड़के और लड़कियो द्वारा निकाले गए डायग्राम पसंद नहीं आते। ओर सभीको बोलते थे ये क्या डायग्राम निकाले – मोरके चोंचमें अनार की कली!!! हम मुस्कुरा देते पर किसी पे हँसते नही क्योकि सब को मालूम था ऐसे विभूषण से कभी न कभी सभी को विभूषित होना ही है। उन्हें मेरा नाम ठीकसे बोलते आता नहीं था। गिरीबाला की जगह मेडम हमेशा मुझे  ग्रेबाला बोलतीं थी। यह सुनकर पूरी क्लास दबे मुह हँसती –  ठहाके लगाने की हिम्मत तो किसी मे न  थी।

 

एक दिन फरतुल्ला सर केमिस्ट्री की टेस्ट ले रहे थे। में और साधना शाह एक ही बेंचपर बैठे थे। उस दिन मेरी पढ़ाई बराबर हुई नहीं थी। इस वजहसे में साधना में से कॉपी कर रही थी। कॉपी करते हुए सरने देख लिया। और हम दोनो को बहुत डाट पड़ी। मुझे बहुत अफसोस हुआ कि मेरी वजहसे साधना को भी डाट खानी पड़ी। तब सोरी नही कहा था तो….. आज भी नही बोलूंगी… मेरी बेस्ट फ्रेंड्स मेसे एक जो है 😊

 

जब प्रैक्टिकल शुरु हुए लड़के और लड़कियां साथमे मिलकर प्रैक्टिकल करने लगे। पहले थोडा संकोच लगता था। लेकिन बादमे सभी नॉर्मल हो गया।  और एक दुसरे की मदद भी करने लगे। और एक दुसरेसे खुलकर बात करते थे। इस प्रकार कॉलेज के तीन साल आनंद से निकल गए। कॉलेज के दिन ओर यादगार लम्हे हम कभी भूल नहीं पाएंगे।

 

देखो साथियो, मैं हिंदी का एग्जाम नही दे रही, व्याकरण आदि की भूल दिखे तो खुद ही सुधार के पढ़ लेना। मुझे भी मत बताना। 

 

और हा एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि आणंद से जब रक्षा का अधिकारपूर्वक यादे लिखने का मुझपर दबाव पड़ा – तो मैं कुछ टेंशन में आ गई थी। जब मेरे जीवनसाथी को मेरी टेंशन का पता चला तो उन्होंने मौका देख कर हौले हौले मुझसे कॉलेज की बाते करने लगे – और कई प्रश्न भी किए। और दुसरे दिन मुझे उन बातों की रिकॉर्डिंग व्हाट्सएप पर भेज दी और साथ मे लिखा था – अपनी बातें अपनी जुबानी सुनलो और यादों को पन्नो पर उतार दो। 

थेँक्यु जी ।🙏

 

इस तरह ये लेख आपके सामने रख पाई। 😊

 “Miss you all my friends and Saifee Golden Jubilee Quadariya College” ❤️❤️

 

–गिरिबाला दलाल उर्फ स्वाती गुजराती

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