PROFILE : यादों का सफर

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Jagdishchandra Bandil

Mrs. Laxmi J Bandil
  • Birthday: 09 September
  • Anniversary: 12 June
  • Burhanpur (MH)
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यादों का सफर - प्रकरण १०

साठ की उम्र में एक शाम यूँ ही,

दिल ने फिर से दस्तक दी कहीं।

पुरानी यादों का दरवाज़ा खुला,

कॉलेज का आँगन फिर आँखों में घुला।

किसी ने फ़ोन किया, आवाज़ वही थी,

पर शब्दों में अब उम्र की नमी थी।

कहा—“चलो यार, एक बार मिल लेते हैं,

कितना जिया, कितना बाकी—सब देख लेते हैं।”

अब बातों में बच्चों की पढ़ाई है,

पेंशन, दवाइयाँ, सेहत की सच्चाई है।

फिर भी हँसी वही, शरारत वही,

दिल अब भी वही है, बस रफ़्तार नई।

रीयूनियन की तारीख़ तय होने लगी,

WhatsApp पर यादों की बारिश होने लगी।

किसी ने भेजी वो धुँधली सी फ़ोटो,

जिसमें सपने थे बड़े, और जेबें थीं खोखो।

कोई प्रोफ़ेसर बना, कोई व्यापारी,

कोई चला गया दूर, विदेश की तैयारी।

पर जैसे ही कॉलेज का नाम आया,

हर चेहरे पर बचपन लौट आया।

याद आई हमें (मैं, राज, दीपक,प्रदीप,पांडे) को साड़ी बाज़ार में परेश की दुकान पर जानता होटल की गर्म गर्म मीठी चाय ,

वो उधार के पैसे, वो दोस्ती की स्याही।

इम्तिहान से पहले की रातें,

और नतीजों के बाद की सौगातें।

मिलेंगे तो पहचानने में देर लगेगी,

नाम याद आएगा, पहचान थोड़ी जगेगी।

कोई कहेगा—“अरे, तू तो बिल्कुल नहीं बदला!”

कोई हँसकर बोलेगा—“तू अब भी वैसा ही निकला!”

कुछ चेहरे अब तस्वीरों में रह गए,

वक़्त से पहले जो हमसे बिछड़ गए।

उनकी कुर्सी खाली, यादें भरी होंगी,

आँखें नम, पर मुस्कान सच्ची होगी।

साठ की उम्र ने ये सिखाया है हमें,

ज़िंदगी भागने का नाम नहीं अब हमें।

अब रिश्तों को जीना आता है,

हर पल को थामना आता है।

कॉलेज रीयूनियन बस मिलना नहीं,

ये फिर से खुद से मिलना होता है कहीं।

कुछ घंटों के लिए ही सही,

पर दोस्ती फिर से ज़िंदा हो जाती है यहीं।

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आप सभी का सहपाठी —

जगदीश बांदिल

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