PROFILE : यादों का सफर
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Sudesh Jaysinghani
Mrs. Rajeshwari Jaysinghani
- Birthday: 20 April
- Anniversary: 23 November
- Burhanpur (MP)

यादों का सफर - प्रकरण ०६
सच में BSC कॉलेज की यादें बहुत प्यारी हैं। पंकज शाह, प्रीति, राजीव, सरोज, राजकुमार सभी ने अच्छी प्रस्तुतियाँ दी थीं। चलो मैं भी थोड़ा सा बताता हूँ, मैंने भी कॉलेज में कई ड्रामे किए थे। मेरी कविता “कम्बख्त चल गई” काफी फेमस हो गई थी। कॉलेज में हमारा फैमिली जैसा माहौल था। अगर मुझे कॉलेज ने सबसे बड़ा तोहफा दिया है, तो वो मेरे दोस्तों ने दिया।
वो दिन आज भी याद है जब मैं पहली बार पंकज से मिला था। मुझे देखते ही पंकज बोला, “बस वहीं से बात आगे बढ़ी, धीरे-धीरे दोस्ती गहरी हो गई।” फिर राजू भी हमसे जुड़ गया। फिर साथ में घूमना, फिर देशभक्ति का फिकर। मैंने कॉलेज में तीन नाटक किए। एक में मैं यमराज बना था, सिर पर मुकुट और हाथ में यमराज का शस्त्र था। मेरी आवाज इतनी गहरी थी कि खुद को भी डर लगने लगा। दूसरा नाटक था सत्यवादी की अदालत, जिसमें पंकज और मैं थे। पंकज मेरे घर में ही पढ़ता था, और राजीव खेडकर भी। कॉलेज के सभी साथी हमारे बहुत अच्छे हैं। हमारी BSC के साथियों की यादें आज भी ताजा हैं।
सुदेश जयसिंघानी
